फरवरी का आधा महीना बीतते-बीतते उत्तर भारत के मौसम में एक बड़ा उलटफेर होने वाला है। 10 फरवरी के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, हालांकि वर्तमान में पहाड़ों पर एक हल्का पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, लेकिन असली चिंता की बात 16 फरवरी से शुरू होने वाला नया मौसमी सिस्टम है। 16 फरवरी की रात से एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ पहाड़ों पर पहुँचेगा, जिसके प्रभाव से राजस्थान के ऊपर एक ‘चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र’ (Cyclonic Circulation) बनेगा। यह सिस्टम अरब सागर से भरपूर नमी खींचेगा, जिससे मैदानी इलाकों में बारिश की प्रबल संभावना बन रही है।
17 और 18 फरवरी को पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इसके साथ ही, 18 और 19 फरवरी को यह बारिश का दौर आगे बढ़कर मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों को भी कवर करेगा। इस दौरान कुछ स्थानों पर तेज हवाएं चलने और ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी आशंका है। यह समय किसानों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि रबी की फसलें (जैसे गेहूं) अब तैयार होने की स्थिति में हैं। तेज हवा और ओलों से खड़ी फसल को नुकसान पहुँचने का डर बना हुआ है।
वर्तमान स्थिति की बात करें तो, दिल्ली और आसपास के इलाकों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। फरवरी को दिल्ली में इस सीजन का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जहाँ पारा 26.7 डिग्री तक पहुँच गया। हवाओं की दिशा बदलने से उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी अब लगभग समाप्त हो चुकी है। हालांकि, 11 फरवरी से एक बार फिर उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाएं चलेंगी, जिससे बढ़ते हुए तापमान पर लगाम लगेगी और पारे में 2 से 3 डिग्री की गिरावट देखी जा सकती है। इससे मौसम सुहावना बना रहेगा, लेकिन कड़ाके की सर्दी की वापसी नहीं होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह ‘ट्रांजिशन फेज’ (बदलाव का समय) सेहत के लिहाज से भी नाजुक होता है, इसलिए सुबह-शाम की हल्की ठंड से बचाव जरूरी है। आने वाले शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ और उससे होने वाली बारिश पर मौसम वैज्ञानिक लगातार नजर बनाए हुए हैं। जैसे-जैसे 16-17 फरवरी की तारीख नजदीक आएगी, यह और स्पष्ट हो पाएगा कि किन विशेष जिलों में ओलावृष्टि की अधिक संभावना है, ताकि किसान भाई समय रहते अपनी उपज को सुरक्षित करने के उपाय कर सकें।












